| हृदय फेकले तुझ्या दिशेने |
| झेलाया तू गेलीस पटकन् |
| गफलत झाली परि क्षणांची |
| पडता खाली फुटले खळ्कन् |
| हृदय फेकले तूही जेंव्हा |
| सुटले तेही,पडलेही पण |
| तुटले नाही-फुटले नाही |
| नाद निघाला केवळ खण्कन् |
| गोष्ट येवढी इथेच थांबे |
| अशा गोष्टींना नसतो नंतर |
| खळ्कन् आणि खण्कन् यांतील |
| कधी कुठे का मिटले अंतर |
| मन पोलादी नकोच तुजसम |
| असो असूदे काच जरीही |
| फुटून जाते क्षणी परंतु |
| गंजायाची भीती नाही |
| --- संदीप खरे. |
cool 1.........
ReplyDeleteMarathi Kavita
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